यह Budget सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह साफ संकेत देता है कि भारत की टैक्स व्यवस्था अब ज्यादा पारदर्शी, सख्त लेकिन साथ ही अवसर देने वाली भी बन रही है। बजट 2026 में आयकर से जुड़े कई ऐसे बदलाव किए गए हैं जो छोटे करदाताओं, एनआरआई, निवेशकों, प्रोफेशनल्स और यहां तक कि दुर्घटना पीड़ितों तक को सीधे प्रभावित करते हैं। एक तरफ सरकार विदेशी आय और संपत्तियों के खुलासे को लेकर सख्ती दिखा रही है, तो दूसरी तरफ स्वैच्छिक अनुपालन के लिए राहत का रास्ता भी खोल रही है। आइए इन बदलावों को विस्तार से समझते हैं।
छोटे करदाताओं के लिए विदेशी आय पर राहत: एमनेस्टी विंडो
बजट 2026 की सबसे चर्चा वाली घोषणाओं में से एक है छोटे करदाताओं के लिए विदेशी आय और संपत्तियों पर विशेष एमनेस्टी (Amnesty) विंडो। यह एक समयबद्ध योजना होगी, जो संभवतः छह महीने के लिए खुलेगी। इसका मकसद उन लोगों को मौका देना है जिनसे पहले विदेशी आय या विदेशी संपत्ति का खुलासा नहीं हो पाया, ताकि वे अब स्वेच्छा से घोषणा कर सकें।
इस योजना के तहत करदाता अपनी विदेशी आय या संपत्ति का विवरण देंगे, बकाया टैक्स और लागू शुल्क का भुगतान करेंगे, और बदले में उन्हें ब्लैक मनी एक्ट के तहत जुर्माने और अभियोजन (prosecution) से छूट मिल सकती है। हालांकि यह राहत उन मामलों पर लागू नहीं होगी जो अपराध की कमाई से जुड़े हैं। यह कदम सरकार की उस नीति को दर्शाता है जिसमें पहले अनुपालन का मौका दिया जाता है, फिर सख्ती की जाती है।
एनआरआई प्रोफेशनल्स के लिए 5 साल का बड़ा टैक्स ब्रेक
विदेश में रहने वाले कुशल भारतीय प्रोफेशनल्स को भारत लाने के लिए सरकार ने बड़ा प्रोत्साहन दिया है। यदि कोई एनआरआई प्रोफेशनल सरकारी स्वीकृत योजना के तहत भारत काम करने आता है, तो उसे अपने विदेशी स्रोतों से होने वाली आय पर पाँच वर्षों तक टैक्स नहीं देना होगा।
यह छूट उसकी पहली कार्य यात्रा से शुरू मानी जाएगी। इससे भारत को ग्लोबल टैलेंट आकर्षित करने में मदद मिलेगी, खासकर टेक, रिसर्च, हेल्थकेयर और रणनीतिक क्षेत्रों में। यह साफ संदेश है कि भारत प्रतिभा को सिर्फ बुलाना ही नहीं चाहता, बल्कि उन्हें कर संरचना में भी सहूलियत देना चाहता है।
PROI की नई परिभाषा और निवेश सीमा दोगुनी
अब “Person Resident Outside India (PROI)” की परिभाषा को व्यापक किया गया है। इसमें सिर्फ एनआरआई ही नहीं, बल्कि PIOs (Persons of Indian Origin) और अन्य विदेशी नागरिक भी शामिल हैं जो भारत के बाहर रहते हैं।
पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम (PIS) के तहत अब:
- एक व्यक्तिगत PROI किसी लिस्टेड भारतीय कंपनी में 5% की जगह 10% तक निवेश कर सकता है।
- सभी PROI मिलकर कुल निवेश सीमा 10% से बढ़ाकर 24% कर दी गई है।
इससे विदेशी निवेशकों को बड़े और दीर्घकालिक निवेश की सुविधा मिलेगी, और बार-बार विदेशी स्वामित्व सीमा छूने के कारण जबरन बिकवाली की स्थिति कम होगी।
मोटर दुर्घटना क्लेम के ब्याज पर पूरी टैक्स छूट
एक मानवीय निर्णय के तहत मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा दिए गए मुआवजे के ब्याज पर अब पूरी आयकर छूट दी गई है। साथ ही इस पर TDS भी नहीं कटेगा।
इसका मतलब है कि दुर्घटना पीड़ितों या उनके परिवारों को मिलने वाली रकम पूरी की पूरी उनके पास पहुंचेगी। यह कदम बीमा प्रणाली को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शेयर बाजार में सट्टेबाजी पर रोक, लंबी अवधि निवेश को बढ़ावा
बजट में कई ऐसे कदम लिए गए हैं जो अल्पकालिक सट्टेबाजी को हतोत्साहित करते हैं:
- F&O लेनदेन पर STT बढ़ाया गया।
- शेयर बायबैक पर टैक्स ढांचे में बदलाव।
- उधार लेकर शेयर या म्यूचुअल फंड खरीदने वालों को अब लोन ब्याज की कटौती का लाभ नहीं मिलेगा।
इससे लीवरेज आधारित ट्रेडिंग महंगी होगी और लंबी अवधि निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
सशस्त्र बलों की विकलांगता पेंशन पर नियम स्पष्ट
अब पूर्ण टैक्स छूट सिर्फ उन्हीं सैन्य कर्मियों को मिलेगी जिन्हें ड्यूटी के दौरान लगी या बढ़ी शारीरिक विकलांगता के कारण सेवा से मुक्त किया गया हो। पहले से छूट ले रहे कुछ लोगों को नए नियमों के तहत पात्रता दोबारा जांचनी पड़ सकती है।
शेयर बायबैक टैक्सेशन में फिर बदलाव
सरकार ने बायबैक को फिर से कैपिटल गेन के रूप में टैक्स करने का प्रस्ताव रखा है, खासकर गैर-प्रमोटर शेयरधारकों के लिए। प्रमोटरों पर अतिरिक्त बायबैक टैक्स लगाने का प्रस्ताव है, ताकि नियमों का दुरुपयोग न हो।
कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को मजबूती
नॉन-डेट नियमों को उदार बनाने और कॉर्पोरेट बॉन्ड पर TRS (Total Return Swaps) को शामिल करने जैसे कदम भारत के बॉन्ड मार्केट को गहरा और अधिक तरल बनाने की दिशा में हैं।
विदेशी संपत्ति का खुलासा अब और जरूरी
यदि आप भारत के टैक्स निवासी हैं और विदेश में संपत्ति रखते हैं या वहां से किराया कमाते हैं, तो उसका खुलासा भारतीय ITR में अनिवार्य है। ऐसा न करने पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
ITR फाइलिंग की नई अंतिम तिथियां
छोटे व्यवसायी और प्रोफेशनल, जिनके खातों का ऑडिट जरूरी नहीं है, वे अब 31 अगस्त तक ITR भर सकेंगे। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए 31 जुलाई की समयसीमा बरकरार है।
FEMA नियमों की व्यापक समीक्षा
FEMA और Non-Debt Instrument नियमों की समीक्षा से विदेशी निवेश के वर्गीकरण, सीमा गणना और रिपोर्टिंग प्रक्रियाएं सरल हो सकती हैं। इससे निवेशकों के लिए अनुपालन आसान होगा।
उधार लेकर निवेश करने वालों पर ज्यादा टैक्स
1 अप्रैल 2026 से यदि आपने लोन लेकर शेयर या म्यूचुअल फंड खरीदे हैं, तो अब डिविडेंड या फंड आय से लोन ब्याज घटाकर टैक्स नहीं बचा सकेंगे। इससे ऐसे निवेशकों की टैक्स देनदारी बढ़ेगी।
निष्कर्ष
बजट 2026 का संदेश साफ है — अनुपालन करो, पारदर्शी रहो, और लंबी अवधि सोचो। छोटे करदाताओं को राहत, एनआरआई को प्रोत्साहन, निवेशकों के लिए नए अवसर और सट्टेबाजी पर नियंत्रण—ये सब मिलकर एक संतुलित टैक्स इकोसिस्टम बनाने की कोशिश हैं। आने वाले वर्षों में इसका असर सिर्फ टैक्स कलेक्शन पर नहीं, बल्कि निवेश संस्कृति और आर्थिक व्यवहार पर भी दिखाई देगा।
FAQs
1. विदेशी आय या संपत्ति का खुलासा न करने पर क्या होगा?
यदि आप विदेशी संपत्ति या आय घोषित नहीं करते, तो ब्लैक मनी एक्ट के तहत भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। नई एमनेस्टी विंडो स्वेच्छा से घोषणा करने का मौका देती है।
2. क्या एनआरआई प्रोफेशनल्स को कोई विशेष टैक्स छूट मिली है?
हाँ, सरकारी स्वीकृत योजना के तहत भारत काम करने आने वाले एनआरआई प्रोफेशनल्स को 5 साल तक विदेशी आय पर टैक्स छूट मिलेगी।
3. PROI कौन हैं और उनके लिए क्या बदला है?
PROI में NRIs, PIOs और विदेशी नागरिक शामिल हैं। अब वे किसी भारतीय कंपनी में 10% तक निवेश कर सकते हैं, जबकि पहले सीमा 5% थी।
4. मोटर दुर्घटना क्लेम के ब्याज पर टैक्स लगेगा क्या?
नहीं, मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए ब्याज पर अब पूरी टैक्स छूट है और TDS भी नहीं कटेगा।
5. ITR भरने की नई अंतिम तिथि क्या है?
छोटे व्यवसायी और प्रोफेशनल (जिन्हें ऑडिट की जरूरत नहीं) 31 अगस्त तक ITR भर सकते हैं, जबकि वेतनभोगियों के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन है।

