भारत के banking क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन होने जा रहा है, जो सीधे आम खाताधारकों को प्रभावित करेगा। 5 फरवरी 2026 से देश के तीन बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक — स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) — अपने सेविंग्स अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस (Minimum Balance) से जुड़े नए नियम लागू करने जा रहे हैं। यह बदलाव केवल एक औपचारिक संशोधन नहीं है, बल्कि डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दौर, बदलते ग्राहक व्यवहार और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। जिन खातों में पहले तय न्यूनतम बैलेंस नहीं रखा जाता था, उन पर इसका असर पहले दिन से दिख सकता है।
नए बैंकिंग नियमों की पृष्ठभूमि
पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ी है। मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग और ऑटोमेटेड सेवाओं ने ग्राहकों के लेनदेन का तरीका बदल दिया है। इसी बदलाव के अनुरूप बैंक अब अपने अकाउंट मेंटेनेंस मानदंडों को भी अपडेट कर रहे हैं। लंबे समय से निष्क्रिय पड़े खातों की संख्या कम करना, सेवा गुणवत्ता सुधारना और खातों को सक्रिय बनाए रखना इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य है। नए नियमों से बैंकिंग प्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।
नए न्यूनतम बैलेंस दिशानिर्देश क्या कहते हैं?
इन दिशानिर्देशों के अनुसार, हर सेविंग्स अकाउंट में एक तय मासिक न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना अनिवार्य होगा। यह राशि अकाउंट के प्रकार और शाखा की श्रेणी (शहरी, अर्ध-शहरी, ग्रामीण) के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। यदि कोई खाता दो लगातार महीनों तक निर्धारित बैलेंस नहीं रख पाता, तो उसे नॉन-कॉम्प्लायंट माना जाएगा और उस पर सेवा शुल्क (Service Charges) लगाए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य खातों को सक्रिय रखना और बैंक को बेहतर सेवा प्रदान करने में सक्षम बनाना है।
ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?
वे ग्राहक जिनका बैलेंस पहले न्यूनतम सीमा से थोड़ा ऊपर रहता था, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। नए नियम लागू होते ही उनके खाते पर अतिरिक्त शुल्क लग सकता है। साथ ही, कुछ सेवाएँ अस्थायी रूप से सीमित भी हो सकती हैं, जैसे — चेक बुक जारी करना, मुफ्त एटीएम निकासी की संख्या, या ओवरड्राफ्ट सुविधा। इसलिए खाताधारकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खाते की स्थिति की समय-समय पर जांच करते रहें और जरूरत पड़ने पर बैलेंस को समायोजित करें।
शाखाओं के आधार पर बैलेंस वर्गीकरण
न्यूनतम बैलेंस की राशि सभी जगह समान नहीं होगी। शहरी शाखाओं में यह राशि अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है, जबकि अर्ध-शहरी और ग्रामीण शाखाओं में यह कम रखी जा सकती है। यह व्यवस्था सेवा लागत और संचालन के खर्च को ध्यान में रखते हुए तय की गई है। बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन राशियों की स्पष्ट जानकारी 5 फरवरी 2026 से पहले अपने ग्राहकों तक पहुंचाएँ।
पेनल्टी से कैसे बचें?
ग्राहक कुछ आसान कदम अपनाकर अतिरिक्त शुल्क से बच सकते हैं। नियमित रूप से खाते का बैलेंस चेक करना, मोबाइल अलर्ट सक्रिय रखना, ऑटो-ट्रांसफर सुविधा का उपयोग करना, और डिजिटल बैंकिंग ऐप्स से लेनदेन पर नजर रखना उपयोगी साबित होगा। छोटे-छोटे वित्तीय प्रबंधन के उपाय बड़े जुर्माने से बचा सकते हैं।
यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?
न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना केवल बैंक का नियम नहीं, बल्कि एक स्वस्थ बैंकिंग प्रणाली की बुनियादी जरूरत है। इससे बैंक के पास परिचालन के लिए तरलता (Liquidity) बनी रहती है और निष्क्रिय खातों की संख्या घटती है। साथ ही, यह ग्राहकों में जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार को भी प्रोत्साहित करता है।
5 फरवरी 2026 से पहले ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
खाताधारकों को चाहिए कि वे बैंक से प्राप्त नोटिफिकेशन या ईमेल को ध्यान से पढ़ें। अपना मोबाइल नंबर और ईमेल अपडेट रखें ताकि कोई भी महत्वपूर्ण सूचना छूट न जाए। यदि न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना कठिन हो, तो ग्राहक जीरो-बैलेंस अकाउंट या अन्य वैकल्पिक जमा योजनाओं पर भी विचार कर सकते हैं।
आगे का रास्ता
SBI, PNB और BOB द्वारा किए जा रहे ये बदलाव भविष्य में बैंकिंग सेवाओं के ढांचे को और स्पष्ट बना सकते हैं। शुरुआत में कुछ ग्राहकों को समायोजन करना पड़ सकता है, लेकिन सही वित्तीय योजना और डिजिटल निगरानी से यह बदलाव सहज हो सकता है। जागरूकता और अनुशासन ही इन नए नियमों के दौर में खाताधारकों की सबसे बड़ी ताकत होगी।
FAQs
1. नए न्यूनतम बैलेंस नियम कब से लागू होंगे?
ये नियम 5 फरवरी 2026 से SBI, PNB और बैंक ऑफ बड़ौदा के सेविंग्स अकाउंट पर लागू होंगे।
2. अगर न्यूनतम बैलेंस मेंटेन नहीं हुआ तो क्या होगा?
लगातार दो महीने बैलेंस कम रहने पर सेवा शुल्क लग सकता है और कुछ बैंकिंग सुविधाएँ सीमित हो सकती हैं।
3. क्या सभी शाखाओं में न्यूनतम बैलेंस समान होगा?
नहीं, शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण शाखाओं के लिए न्यूनतम बैलेंस अलग-अलग हो सकता है।
4. पेनल्टी से बचने के लिए क्या करना चाहिए?
नियमित बैलेंस चेक करें, मोबाइल अलर्ट चालू रखें और जरूरत हो तो ऑटो-ट्रांसफर सेट करें।
5. अगर न्यूनतम बैलेंस रखना मुश्किल हो तो क्या विकल्प है?
ग्राहक जीरो-बैलेंस अकाउंट या अन्य उपयुक्त बैंकिंग योजनाओं पर विचार कर सकते हैं।


