मंगलवार, 3 फरवरी को Silver के बाजार में ऐसी हलचल देखने को मिली जिसने निवेशकों, व्यापारियों और आम खरीदारों सभी को चौंका दिया। लंबे समय से स्थिर या सीमित उतार-चढ़ाव दिखाने वाली चांदी की कीमत में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई। प्रति किलोग्राम चांदी के भाव में करीब ₹1.88 लाख की गिरावट आई, जो हाल के वर्षों में देखी गई सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावटों में से एक मानी जा रही है। इस तेज गिरावट ने न केवल सर्राफा बाजार बल्कि अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट पर भी गहरा असर डाला है। कई निवेशकों के लिए यह खबर चिंता का विषय बनी, वहीं कुछ लोगों ने इसे खरीदारी का सुनहरा मौका भी माना।
मंगलवार को कितनी गिरी चांदी की कीमत?
3 फरवरी को जैसे ही बाजार खुले, चांदी की कीमतों में दबाव साफ नजर आने लगा। सुबह के कारोबार में ही संकेत मिल गए थे कि आज चांदी के दाम कमजोर रह सकते हैं। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, गिरावट और गहरी होती चली गई। अंततः प्रति किलोग्राम चांदी की कीमत में ₹1.88 लाख तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कई प्रमुख शहरों में जहां चांदी का भाव पहले रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा हुआ था, वहीं अब उसमें भारी कटौती देखी गई। इस गिरावट ने उन लोगों को झटका दिया जिन्होंने ऊंचे दामों पर हाल ही में निवेश किया था।
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चांदी की कीमत में गिरावट के पीछे प्रमुख कारण
चांदी की कीमतों में आई इस भारी गिरावट के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण माने जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कमजोर मांग है। हाल के दिनों में अमेरिका और यूरोप की अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े उम्मीद से बेहतर आए हैं, जिससे डॉलर मजबूत हुआ है। डॉलर की मजबूती का सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ता है, क्योंकि जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना और चांदी जैसी धातुएं महंगी हो जाती हैं और उनकी मांग घट जाती है।
इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी चांदी की कीमतों पर दबाव डाल रही है। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश से दूरी बनाकर शेयर बाजार और बॉन्ड जैसे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि चांदी जैसे कमोडिटी इंस्ट्रूमेंट्स से पैसा निकलता दिख रहा है।
औद्योगिक मांग में कमी का असर
चांदी केवल एक कीमती धातु ही नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण औद्योगिक धातु भी है। इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, ऑटोमोबाइल और मेडिकल उपकरणों में बड़े पैमाने पर होता है। हाल के समय में वैश्विक स्तर पर औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार कुछ धीमी हुई है, जिसका असर चांदी की मांग पर पड़ा है। खासकर चीन और यूरोप जैसे बड़े औद्योगिक बाजारों से कमजोर मांग के संकेत मिलने के बाद चांदी की कीमतों में दबाव और बढ़ गया।
भारत में चांदी के भाव पर क्या पड़ा असर?
भारत में चांदी को निवेश के साथ-साथ आभूषण और धार्मिक उपयोग के लिए भी खरीदा जाता है। मंगलवार को आई इस भारी गिरावट का असर देश के लगभग सभी प्रमुख सर्राफा बाजारों में देखने को मिला। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और जयपुर जैसे शहरों में चांदी के भाव में तेज गिरावट दर्ज की गई। हालांकि कीमतों में कमी के बावजूद बाजार में खरीदारी सीमित ही रही, क्योंकि कई खरीदार अभी और गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं।
ग्रामीण इलाकों में जहां चांदी की मांग पारंपरिक रूप से अधिक रहती है, वहां भी खरीदार सतर्क नजर आए। त्योहारों और शादियों के सीजन के बावजूद लोग जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचते दिखे।
निवेशकों के लिए चिंता या मौका?
चांदी की कीमत में ₹1.88 लाख प्रति किलोग्राम की गिरावट ने निवेशकों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या यह चिंता का संकेत है या एक अच्छा मौका? जिन निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर चांदी खरीदी थी, उनके लिए यह गिरावट निश्चित रूप से नुकसानदेह साबित हुई है। हालांकि, लंबे समय के निवेशकों का मानना है कि चांदी में इस तरह की गिरावट अस्थायी होती है और समय के साथ कीमतें फिर से संभल सकती हैं।
वहीं, नए निवेशकों के लिए यह गिरावट एक अवसर के रूप में देखी जा रही है। कम कीमत पर चांदी खरीदकर भविष्य में बेहतर रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है, बशर्ते निवेश लंबी अवधि के नजरिए से किया जाए।
विशेषज्ञों की राय क्या कहती है?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट पूरी तरह से वैश्विक संकेतों से जुड़ी हुई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक डॉलर मजबूत बना रहेगा और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता रहेगी, तब तक चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि यदि औद्योगिक मांग में सुधार होता है या वैश्विक आर्थिक हालात में नरमी आती है, तो चांदी की कीमतों को सहारा मिल सकता है।
आने वाले दिनों में चांदी के भाव का अनुमान
आने वाले दिनों में चांदी के भाव को लेकर बाजार में मिली-जुली राय देखने को मिल रही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में अभी और गिरावट संभव है, जबकि कुछ का कहना है कि मौजूदा स्तर पर कीमतें स्थिर हो सकती हैं। यदि वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है या भू-राजनीतिक तनाव उभरता है, तो चांदी एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में आकर्षण का केंद्र बन सकती है।
आम खरीदारों को क्या करना चाहिए?
आम खरीदारों के लिए यह समय सोच-समझकर फैसला लेने का है। अगर चांदी का उपयोग आभूषण या घरेलू जरूरतों के लिए किया जाना है, तो कीमतों में आई गिरावट का फायदा उठाया जा सकता है। हालांकि निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वालों को बाजार की चाल पर नजर बनाए रखनी चाहिए और जल्दबाजी से बचना चाहिए।
निष्कर्ष: चांदी बाजार में अस्थिरता का दौर
मंगलवार, 3 फरवरी को चांदी की कीमत में प्रति किलोग्राम ₹1.88 लाख की भारी गिरावट ने यह साफ कर दिया है कि फिलहाल चांदी का बाजार अस्थिर दौर से गुजर रहा है। वैश्विक आर्थिक संकेत, डॉलर की मजबूती और औद्योगिक मांग में उतार-चढ़ाव जैसे कारक कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं। निवेशकों और खरीदारों के लिए जरूरी है कि वे बाजार की स्थिति को समझें और किसी भी फैसले से पहले पूरी जानकारी लें। आने वाले समय में चांदी की कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह काफी हद तक वैश्विक हालात पर निर्भर करेगा।
पूछे जाने वाले प्रश्न
1. आज चांदी की कीमत में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर मांग, डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों की अनिश्चितता के कारण चांदी के भाव गिरे हैं।
2. क्या चांदी की कीमत आगे और गिर सकती है?
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है और अल्पकाल में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
3. क्या यह चांदी खरीदने का सही समय है?
लंबी अवधि के निवेश और आभूषण खरीदने वालों के लिए मौजूदा गिरावट को एक अवसर माना जा सकता है।
